सुनो जो सब कहें . करो जो दिल कहें . सबका कहा करते रहे तो खुद का कहा कब करोगे . उपदेश देने वालों की कमी नहीं है दुनिया में . कोई कहेगा डा . कलाम ने ये कहा है . कोई कहेगा नेहरू ने ये कहा है , गांधी जी ने ये कहा है , फलाने ने ये कहा है , धमाके ने ये कहा है .
कोई ये बतायेगा कि कितने फलाने और धमाके हैं दुनिया में ? ; ज़िसके अनुसार चलना है हमे .
चाहे वो कितना भी महान क्यों न हो . उसकी हर बात अच्छी और प्रेरनादायक नहीं हो सकती .
यहां तक की गीता और रामायण के भी सभी उपदेश वर्तमान में लागू नहीं होते .
आप अपने विवेक से काम करिये .
सबकी सुनते रहे और मानते रहे तो पागल हो जायेंगे

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