आप अपने हाथ में पानी से भरा एक ग्लास ले लीजिये और सोचिये ये कितना भारी है या कितना वज़न है इसका। आप अनुमान लगाएंगे , थोड़ा सा , शायद आधा लिटर, शायद 1 लिटर ।
इस ग्लास का कितना भार या कितना वज़न है ये बिल्कुल Important नहीं है । अगर आप इसे एक या दो मिनट पकड़े रखते हैं तो यह हल्का लगेगा, अगर आप इसे एक घंटे पकड़े रखेंगे तो इसके भार से आपके हाथ मे थोड़ा सा दर्द होगा, अगर आप इसे पूरे दिन पकड़े रखेंगे तो आपके हाथ एकदम सुन्न पड़ जाएँगे और पानी का यही ग्लास जो शुरुआत मे हल्का लग रहा था उसका भार या वज़न इतना बढ़ जाएगा की अब ग्लास हाथ से छूटने लगेगा। तीनों ही conditions मे पानी के ग्लास का भार / वज़न नहीं बदलेगा लेकिन जितना ज्यादा आप इसे पकड़े रखेंगे उतना ज्यादा आपको इसके भारीपन का एहसास होता रहेगा।
”आपके जीवन की चिंताए (tension) और तनाव(stress) काफी हद तक इस पानी के ग्लास की तरह है। इन्हे थोड़े समय के लिए सोचो तो कुछ नहीं होता, इन्हे थोड़े ज्यादा समय के लिए सोचो तो इससे इससे थोड़ा सरदर्द का एहसास होना शुरू हो जाएगा, इन्हे पूरा दिन सोचोगे तो आपका दिमाग सुन्न और गतिहीन पड़ जाएगा ”
आप अपनी चिंताए (tensions ) छोड़ दे, जितनी देर आप tension अपने पास रखोगे उतना ही इसके भार / वज़न का एहसास बढ़ता जाएगा।
चिंता (tension) और तनाव (stress) उन पक्षियो की तरह है जिन्हे आप अपने आसपास उड़ने से नहीं रोक सकते लेकिन उन्हे अपने मन मे घोसला बनाने से तो रोक ही सकते है

Kya baat hai sir ji agar Ye baat asaani se log samajh jaye to tension ki wajah se jo rog tezi se pair pasaar rha h wo kuch hadd tak kaabu paya ja sakta hai.. Bhawateet dhyan (transidental meditation) Ek stress reliever hai.
ReplyDeleteThanks shruti
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